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धार्मीक एवं संस्कृति विभाग

र्धम व संस्कृति विभाग तिब्बत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण व उसे बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है, जो अपनी अपने मातृभूमि में ही विनाश होने की कगार पर है। पिछले चार दशकों में निर्वासित तिब्बती समुदाय ने २०० से अध्कि मठ स्थापित किए हैं और जिनमें २० हजार भिक्षु व भिक्षुणियां रहती हैं।
र्धम व संस्कृति विभाग इन सांस्कृतिक संस्थाओं को सहयोगी सेवाएं प्रदान करता है। यह दुनिया भर के बौध केंद्रों के साथ गहन संपर्क रखता है।
मठों के अलावा तिब्बती आध्यात्मिक व र्धम निरपेक्ष परंपराओं के अध्ययन के लिए कई सांस्कृतिक केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। इनमें से कुछ केंद्र स्वायत्त संस्थान हैं जिन्हें भारत सरकार की आर्थिक मदद से चलाया जाता है, जबकि दूसरे संस्थानों को सीधे र्धम व संस्कृति विभाग द्वारा संचालित किया जाता है। भारत में संचालित होने वाली कुछ प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र हैं- टिबेटन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स; र्धमशाला, टिबेट हाउस;नई दिल्ली द लाइब्रेरी ऑफ टिबेटन वर्क्स एंड आर्किव्स;र्धमशाला द सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर हायर टिबेटन स्टडीज; सारनाथ और नॉर्बूलिंगखा इंस्टीट्यूट फॉर टिबेटन कल्चर;सिधपुर, र्धमशाला।

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