[बुधवार, 13 जनवरी, 2010 | स्रोत : महामेघा]
चंद्रगिरी। तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा ने कहा है कि वह भारत और चीन के बीच आपसी भरोसा वाले शांतिपूर्ण रिशते कायम करने के पक्षधर हैं, क्योंकि यह दोनो देशों मे रह रहे करोड़ो लोगों के जीवन से जुड़ा मामला है।
दलाई लामा बुधवार यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत औऱ चीन के संबंध हला के दिनों में उतने पारदर्शी नहीं रहा गए है जितने की होने चाहिए। दोनों देशों के लोगों को शांति का माहौल मिलना चाहिए। इस लिए दोनों को आपसी भरोसे वाला संबंध कायम करना होगा। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दलाईलामा बारह जनवरी को यहां आए थे। वह राज्य की चार दिन की यात्रा के दौरान कई समारोह में भाग लेंगे। उन्होंने यहां आठ करोड़ की लागत से बने पद्मसंभव महावीर मठ का मंगलवार को उदघाटन किया।
उन्होंने माओवाद पर पूछे गए सवाल पर कहा कि हिंसा से किसी मामले का हल नहीं निकलता और तिब्बतियों को माओवादियों से कोई खतरा नहीं है, क्योंकि माओवाद एक सामाजिक समस्या है। उन्होंने कहा कि एक खुशहाल जीवन जीने के लिए दिमागी शांति की बहुत जरूरत है और हम सबको खुशियां भरी जिंदगी जीने का हक है। दया और क्षमा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और समरसता की भावना के साथ जीना चाहिए।
दलाई लामा ने तिब्बत पर पड़ रहे ग्लोबल वार्मिंग के असर की चर्चा करते हुए कहा कि इसकी वजह से वहां के तापमान में दशमलव तीन डिग्री सेल्सियस की वृद्घि हुई है इसका तिब्बत पर गहरा असर पड़ेगा। इसलिए वहां के पर्यावरण को बचाए जाने के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है।
एक चीनी शोधकर्ता को तिब्बत को उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के बाद तीसरा ध्रुव बताए जाने को दोहराते हुए दलाई लामा ने कहा कि ऊचाई पर बसे इलाकों के पर्यावरण का हमें विशेष ध्यान रखना होगा।
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