[शनिवार, 16 जनवरी, 2010 | स्रोत : भास्कर न्यूज]
वडोदरा: बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में कोई भी धर्म बड़ा नहीं है। सभी धर्म समान हैं। भारत में हर धर्म को सम्मान दिया जाता है। सही मायने में भारत दुनिया का सबसे बड़ा गैरसांप्रदायिक देश है। मैं भी भारत का पुत्र हूं। मुझे भारतीय होने का गर्व है। वे एम.एस. विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म पर आयोजित त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उधर, मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुजरात में विशाल बौद्ध मंदिर का निर्माण किया जाएगा।
राज्य में बौद्ध संस्कृति की विशाल धरोहरें मौजूद हैं। राज्य के देवनीमोरी, वडनगर, जूनागढ़, गिरनार, कच्छ व भरूच सहित कई क्षेत्रों में बौद्ध धर्म का काफी प्रभाव है। दिव्य बुद्ध मंदिर में मात्र प्रार्थना ही नहीं बौद्ध धर्मावलंबियों व बौद्ध तत्वविदों के लिए शोध का मुख्य अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनेगा। इसमें बौध धर्म के ऐतिहासिक अवशेषों का शोध, विकास व अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने बौद्ध धर्मगुरु से सहयोग की अपील की।
मोदी व दलाईलामा में करीब आधे घंटे तक वार्ता चली। दलाईलामा ने कहा कि 20वीं सदी में विज्ञान व तकनीक का अधिकतम विकास हुआ है। नए-नए शोध हुए हैं लेकिन इसी सदी में विश्व में लगभग 20 करोड़ लोग युद्ध व आतंकवाद की लड़ाई में मारे गए। हिंसा व आतंकवाद की लड़ाई के खिलाफ अहिंसा, शांति व मानवता की शक्तियों का वैश्विक प्रभाव कारगर साबित होगा। मानव को हिंसा, शोषण व अशांति से उबारने के लिए नैतिक मूल्य प्रभावी साबित होंगे। वैश्विक मंदी के कारण नैतिक मूल्यों का पतना हुआ है। पर्यावरण संकट भी मानवसर्जित समस्या है। 21वीं सदी भौतिक सुविधाओं से सुख की भ्रांति पैदा करने वाली साबित होगी जबकि प्रेम, करूणा, मानवता व सहिष्णुता के मानसिक मूल्यों से आद्यात्मिकता को दिशा दी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद के आरंभ में महाबोधि संस्था के डॉ. भूपेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया की नजर भारत पर है। लोग भारत को अलग नजरिए से देख रहे हैं।
दलाई लामा का फिंगर प्रिंट लिया गया
एमएस विवि में स्थित कला संकाय के म्यूजियम में इन सर्च ऑफ सियर की प्रदर्शनी में दलाई लामा की फिंगर प्रिंट ली गई। इसके लिए विशेष प्रकार की भीगी मिट्टी की दो ट्रे तैयार की गई थी। उनके दोनों हाथों की फिंगर प्रिंट ली गई। इस प्रिंट के आधार पर मोल्ड तैयार कर पंचधातुओं से उनके दोनों हाथों के पंजे बनाए जाएंगे जिसे म्यूजियम में रखा जाएगा।
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