रविवार, 5 सितम्बर, 2010

[शुक्रवार, 15 जनवरी, 2010 | स्रोत : जनसत्ता]

भुवनेशवर, 14 जनवरी। भारत को गुरू और बौद्धों को उसका विशवसनीय चेला करार देते हुए तिब्बत के आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने मानवता के कल्याण के लिए गुरूवार को भारत से अहिंसा और धार्मिक सौहार्द को प्रोत्साहित करने में साक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
दलाई लामा ने एक धार्मिक समारोह के दौरान यहां कहा-समय आ गया हैं मेरे गुरू (भारत) को अहिंसा और धार्मिक सौहार्द को प्रोत्साहित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। अहिंसा और धार्मिक सौहार्द को भारत की दो महत्तवपूर्ण संपत्ति करार देते हुए उन्होंने कहा कि बौद्धों ने अभी तक भारत के इस नेक सिद्धांत को जीवित रखा है। उन्होंने कहा-भारत के इस खजाने की हम जैसे चेलों ने जीवित रखा है। हम देश के विशवसनीय चेले हैं। उन्होंने भारतीय नेतृत्व से अहिंसा के संदेश को फैलाने का आग्रह किया।

भारत को अहिंसा का संदेशवाहक करार देते हुए दलाई लामा ने कहा कि उसने लंबे समय से समुदायों की बेहतरी के लिए अहिंसा को माध्यम बताया है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों को फलने फूलने का मौका देते हुए भारत ऐतिहासिक रूप से अन्य लोगों के धर्मों के प्रति सहिष्णु रहा है। अहिंसा और धार्मिक सौहार्द के क्षेत्र में भारत आदर्श है हालांकि ओडिश में ईसाई मिशनरी को जलाने जैसी कुछ घटनाएं सामने आई हैं। इधर, ओडिशा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री दलाई लामा के राज्य के दौरे से अलग रहे, और उनसे मुलाकत नहीं की। हालांकि राज्य विधानसभा के अध्यक्ष और कई मंत्रियों ने आध्यात्मिक गुरू से मुलाकात की। राज्य के पर्यटन व संस्कृति मंत्री और अन्य अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर उन्की आगवानी की।