रविवार, 5 सितम्बर, 2010

[शुक्रवार, 29 जनवरी, 2010 | स्रोत : महामेघा]

पेइचिंग। बौद्घ धर्मगुरू दलाई लामा की तिब्बत को स्वायत्तता दिए जाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे तिब्बती निर्वासित सरकार के प्रतिनिधि चीन सरकार के अधिकारियों के साथ नौंवे दौर की बातचीत के लिए पेइचिंग पहुंच गए हैं। नवंबर 2008 के बाद यह पहला मौका है जब दोनों पक्ष बातचीत के लिए इकट्ठा हुए हैं। पिछले कुछ समय में चीन सरकार ने कड़ा रवैया अपनाते हुए तिब्बत मसले पर बातचीत करने से इनकार कर दिया था।

लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों के दबाव में अब एक बार फिर बातचीत शुरू हुई। हालांकि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मा झाओक्सू ने इस वार्ता में उठाए जाने वाले मुद्ददों पर पूछे गए सवालों का जवाब देने से इनकार कर दियाष लेकिन ऐसा समझा जा रहा है कि तिब्बती प्रतिनिधि स्वायत्तता की अपनी मांग को एक बार फिर उनके सामने रख सकते हैं। पिछली बार भी उन्होंने कहा था कि स्वायत्तता का प्रावधान चीन के संविधान के अनुरूप है औऱ तिब्बत को यह दर्जा मिलना चाहिए। गौरतलब है कि चीन ने 1950 के दशक के अंतिम वर्षों में तिब्बत को अपना हिस्सा बताते हुए नियंत्रण में ले लिया था। उसके बाद से ही तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरू दलाई लामा भारत में रहते हुए तिब्बत की मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

हालांकि पहले वह तिब्बत की पू्र्ण आजादी के पक्षधर थे लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि (सार्थक स्वायत्तता) मिलने से भी तिब्बत के लोग खुश हो जाएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमें उम्मीद है कि दलाई लामा एक बार फिर बातचीत शुरू होने से खुश होंगे और हमारी सरकार के अनुरोध का सकारात्मक जवाब देंगे। इस बातचीत में दलाई लामा का प्रतिनिधित्व लाड़ी जी गियारी और केलसंग ग्लेत्सन करेंगे। इस बीच अमेरिका और ब्रिटेन ने तिब्बत मुद्दे पर बातचीत दोबारा शुरू होने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि इससे लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान को उचित मंच मिल सकेगा।