[बुधवार, 3 फरवरी, 2010 | स्रोत : tibet.net]
दूत केलसांग ग्यालसेन और मैं, अपने कार्यदल के दो अन्य सदस्यों तेनजिन पी अतिशा और भुचुंग के छेरिंग और कार्यदल सचिवालय के जिग्मे पसांग के साथ चीनी नेतृत्व के प्रतिनिधियों के साथ नौवें दौर की वार्ता के लिए 26 से 31 जनवरी, 2010 तक चीन के दौरे पर गए थे। करीब 15 महीनों के अंतराल के बाद इस तरह की वार्ता का अवसर मिला था। हम 1 फरवरी, 2010 को धर्मशाला लौट आए और हमने परम पावन दलाई लामा, कालोन ट्रिपा सामदोंग रिनपोछे और निर्वासित तिब्बती संसद के अधयक्ष एवं उपाध्यक्ष को वार्ता के बारे में जानकारी दी।
बीजिंग में हमने 30 जनवरी को चीन के पीपुल्स कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और केंद्रीय यूनाइटेड फ्रंड वर्क डिपार्टमेंट के मंत्री श्री डु क्विंगलिन से मुलाकात की। हमने 31 जनवरी, 2010 को कार्यकारी उप मंत्री झू वेक्युन और उप मंत्री सिथर से दिन भर वार्ता की। इस दौरान हुई बैठकों में तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र के पीपुल्स कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्री निमा छेरिंग भी मौजूद थे।
हम सबसे पहले हुनान प्रांत की राजधानी चंगाशा में 26 जनवरी, 2010 को पहुंचे। वहां अपने किसी कार्यक्रम की शुरूअत से पहले हमने औपचारिक रूप से सभी तिब्बतियों को वास्तविक स्वायत्तता के ज्ञापन से संबंधित एक नोट केंद्रीय यूनाइटेड फ्रंड वर्क डिपार्टमेंड को सौंपा। नवंबर, 2008 में पिछले आठवें दौर की वार्ता के दौरान हमने यह ज्ञापन दिया था। इस नोट में उन सात बिंदुओं को शामिल किया गया जिससे चीनी नेतृत्व द्वारा आठवें दौर में उठाए गए बुनियादी चिंताओं का समाधान होता हो। इन सात बिंदुओं में चीन जनवादी गणराज्य (पीआरसी) की प्रभुसत्ता और क्षेत्रीय एकता का सम्मान करना, पीआरसी के संविधान का सम्मान करना, तीन अनुसरणों का सम्मान, केंद्रीय चीन सरकार के उच्च स्थान एवं सत्ता का सम्मान करना, ज्ञापन में कुछ खास बिंदुओं पर केंद्रीय चीन सरकार की चिंताओं का समाधान, मुख्य मसले की पहचान और परस्पर स्वीकार्य हल के लिए परम पावन दलाई लामा के सहयोग का प्रस्ताव जैसी बाते शामिल थीं।इस नोट में यह बात साफ तौर पर बताई गई कि परम पावन दलाई लामा और निर्वासित सरकार के अन्य नेताओं की कोई व्यक्तिगत मांग नहीं है।
परम पावन को तिब्बती जनता के अधिकारों और कल्याण की ही चिंता है। इसलिए बुनियादी मसला यह है कि वास्तविक स्वायत्तता को ईमादारी से लागू किया जाए जिससे तिब्बती जनता अपनी समझ और जरूरतों के हिसाब से खुद पर शासन कर सके।परम पावन दलाई लामा तिब्बत की जनता की तरफ से बोलते हैं, जिनके साथ उनका पूरी तरह भरोसे पर आधारित गहरा और ऐतिहासिक रिशता है।
इस बात पर कोई दो राय नहीं हो सकती कि परम पावन वैधानिक रूप से तिब्बती जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें निशिचत रूप से तिब्बतियों का सच्चा प्रतिनिधि और प्रवक्ता माना जाता है। तिब्बत मसले का समाधान सिर्फ परम पावन दलाई लामा से बातचीत करके ही निकल सकता है। इस सचाई को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है। हमने इस बात पर जोर दिया कि परम पावन तिब्बत आंदोलन के लिए अगर लगे हैं तो इसलिए नहीं कि अपने लिए कोई व्यक्तिगत अधिकार या राजनीतिक पद चाहते हैं और न ही वह निर्वासित तिब्बती प्रशासन में भी शामिल होने की कोई दावेदारी करते हैं।
हमने चीनी नेतृत्व से कहा कि वह परम पावन के खिलाफ निराधार आरोप लगाने और उन्हें अलगाववादी प्रचारित करने का प्रयास बंद करे। हमने चीनी नेतृत्व से अनुरोध किया कि इसके बदले वह परम पावन के साथ मिलकर ज्ञापन के आधार पर तिब्बत समस्या का परस्पर स्वीकार्य हल निकालने के लिए काम करे। इससे एक शांतिपूर्ण समाज में स्थिरता, एकता और विकास सुनिशिचत हो सकेगा।
चीनी पक्ष ने अपनी तरफ से चार बातों में शामिल न होने की बात रखी। उन्होंने हमें तिब्बत से जुड़े हाल के घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी, खासकर महत्वपूर्ण पांचवें टिबेट वर्क फोरम के बारे में। उन्होंने कहा कि फोरम ने तिब्बत स्वायत्ततशासी क्षेत्र और सभी तिब्बती क्षेत्रों में तिब्बतियों के जीवन स्तर में और सुधार करने का निर्णय लिया हैं, खासकर शिक्षा, चिकित्सा सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण में। फोरम से हासिल प्रारंभिक जानकारी के आधार पर हमने इस बात का इस लिहाज से स्वागत किया कि इससे तिब्बती जनता, खासकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की हालत में सुधार होगा। हमने इस तथ्य का स्वागत किया कि पांचवें टिबेट वर्क फोरम ने समूचे तिब्बती क्षेत्र (तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र और अन्य तिब्बती क्षेत्रों) में विकास के मसले पर ध्यान दिया है। हमारा यह स्पष्ट मानना है कि समूचे राजनीतिक नारों को दूर कर दें, तो फोरम ने ज्यादातर जिन मसलों पर जोर दिया था, वे हमारे द्वारा दिए गए ज्ञापन में रेखांकित तिब्बती जनता की बुनियादी जरूरतों के पूरा करने जैसा ही है।
दोनों पक्षों मे सबसे बड़ा मतभेद तिब्बत की मौजूदा हालत को लेकर टकरावपूर्ण परिप्रेक्ष्य था। इस प्रकार, असल परिस्थिति की साझा समझ बनाने के लिए हमने सुझाव दिया कि जमीनी हालत का अध्ययन करने के लिए साझा प्रयास किया जाए ताकि तथ्यों के आधार पर सचाई का पता चल सके। इससे दोनों पक्षों को एक-दूसरे के टकराव बिंदु से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
अगले दिनों में हम प्रतिपक्ष द्वारा उठाए गए मसलों का अध्ययान करेंगे, जिनमें पांचवें टिबेट वर्क फोरम और चार बातों में शामिल नहीं होने के बिंदु भी शामिल होंगे। जैसा कि हमने बैठक के दौरान आग्रह किया है, मुझे पूरी उम्मीद है कि चीनी नेतृत्व हमारे द्वारा उठाए गए मसलों पर गंभीरता से
विचार करेगा। परम पावन दलाई लामा ने लगातर अपना यह नजरिया पेश किया है कि चीन जनवादी गणराज्य के ढांचे के भीतर ही तिब्बत का भविष्य होगा, इसलिए चीनी नेतृत्व की तरफ से भी राजनीतिक इच्छाशक्ति को देखते हुए हमें कोई वजह नजर नहीं आती कि इन मसलों को साझे आधार पर हल न किया जा सके। हम इस बात को दोहराना चाहेंगे कि परम पावन लगातार यह इच्छा जताते रहे हैं कि चीन की केंद्रीय सरकार के साथ वे मिलकर कार्य करें ताकि तिब्बती जनता को अपना सम्मान और गौरव फिर से हासिल हो सके तथा चीन जनवादी गणतंत्र की स्थिरता एवं एकता भी सुनिशिचत हो सके। अपनी यात्रा के दौरान आतिथ्य सत्कार के लिए हम अपने मेजबानों द हुनान यूनाइटेड फ्रंट, बीजिंग यूनाइटेड फ्रट और केंद्रीय यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपाटमेंड को धन्यवाद देते है।
2 फरवरी, 2010 धर्मशाला |