रविवार, 5 सितम्बर, 2010

[रविवार, 24 जनवरी, 2010 | स्रोत : Guwahati paper]

गुवाहटी, 24 जनवरी। भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि तिब्बत पर चीन के 1950 से अवैध अधिकार और तिब्बतियों के धर्म और संस्कृति नष्ट करने के प्रयास के विरोध में जनजागरण करने के लिए हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में स्थित तिब्बत निर्वासित सरकार के मुख्यालय से अगले कुछ महीनों में एक जनजागरण के लिए मंच एत रैली का आयोजन करेगा। यह रैली देश के विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए अरूणाचल-तिब्बत सीमा पर स्थित तवांग में समाप्त होगी। स्मरण रहे कि तिब्बतियों के तीसरे दलाई लामा तवांग के ही थे।

इसलिए तवांग तिब्बतियों के लिए बहुत बड़े श्रद्धा और सम्मान का केंद्र है। भारत-चीन विवाद का उत्तर-पूर्व क्षेत्र पर प्रभाव विषय पर आज यहां आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए डॉ. अग्निहोत्री ने कहा कि भारत के विदेश मंत्रालय में एक चीन समर्थित लाबी है जो भारत की अपेक्षा चीन के हितों का ख्याल रखती है। भारत सरकार अब तक इस बात का ध्यान नहीं दे रही हैं कि हमारी सीमा तिब्बत से लगती है-चीन से नहीं। चीन द्वारा तिब्बत पर अवैध अधिकार करने के कारण चीन से विवाद खड़ा हुआ है।

भारत-चीन वार्ता तिब्बत की स्वायत्तता या कम से कम स्वतंत्रता का मुद्दा लाना आवशयक है। इसके कारण ही चीन मैक मोहन लाइन को साम्राज्यवादी सीमा मानता है। दूसरी ओर बर्मा (म्यामां) के साथ इसे वैध सीमा मानता है। इसके विरूद्ध भारत को सामरिक दृष्टि से मजबूत बनाकर चीन को अहसास कराना जरूरी है कि भारत 1962 वाला नहीं बल्कि उसे सबक सिखाने की सामर्थ्य और सिद्धता रखता है।

इस कार्यक्रम में असम पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक एसपी कर, राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी के पूर्व प्रो.डॉ. भारत चंद कलिता और सेवानिवूत्त कर्नल मनोरंजन गोस्वामी ने भाग लेते हुए इस समस्या के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विवेचन किया। चर्चा की शुरूआत डॉ.योगेंद्र मल्लिक ने करते हुए इस समस्या के कारणों की व्याख्या मानचित्रों की सहायता से की। भारत-तिब्बत सहयोग मंच, असम के संयोजक जवाहर ठाकुर ने इस परिचर्चा में भाग लेकर इसे सफल बनाने के लिए उपस्थित लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया।