[रविवार, 18 जुलाई, 2010 | स्रोत : जनतंत्र]
तिब्बत की स्वायत्ता की संभावना के बारे में आशान्वित होकर बोलते हुए तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा ने चीनी साम्यवाद के चरित्र में आए बदलाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पूंजीवादी कम्युनिस्ट में बदल गए हैं।
तिब्बती धर्म गुरु, दलाई लामा ने एक बार फिर अपना दृढ़ विश्वास जाहिर किया है कि एक दिन वह तिब्बतियों के लिए स्वायत्तता हासिल करने में कामयाब जरूर होंगे।
निर्वासित तिब्बती सरकार की वेबसाइट के अनुसार, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, दलाई लामा ने एक साक्षात्कार में कहा है, “आप जानते हैं, मेरे पास मेरा अपना मंत्र है – हम आजादी नहीं मांग रहे हैं। और चीनियों के पास अपना मंत्र है – तिब्बत चीन का हिस्सा है।”
दलाई लामा ने कहा, “मुझे विश्वास है कि बीच का रास्ता जरूर निकलेगा। पिछले 60 वर्षो के दौरान उसी एक दलीय व्यवस्था में बदलाव आया है। बड़ा बदलाव यह हुआ है कि चीनी कम्युनिस्ट, पूंजीवादी कम्युनिस्ट में बदल गए हैं।”
उन्होंने कहा, “सोच बदल रही है, इस बात की बड़ी संभावना है कि हमारा मध्यमार्गी दृष्टिकोण साकार होगा। लेकिन यह प्रक्रिया अनवरत, बहुत धीरे-धीरे चलेगी। यदि मैं अगले 10-15 वर्षो तक जीवित रहा तो मैं इसे देख सकता हूं। यदि कल मेरा निधन हो गया तो मैं बदलाव नहीं देख सकता।”
दलाई लामा ने यह भी कहा, “तिब्बत, दलाई लामा की संस्था का कोई मुद्दा नहीं है, यह 60 लाख तिब्बतियों की बेहतरी और उनके अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। जब तक ये अधिकार प्राप्त नहीं हो जाते, तब तक तिब्बत के मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रहेगा, चाहे मैं जिंदा रहूं या नहीं। महत्वपूर्ण बौद्ध धर्म और तिब्बत की संस्कृति है, दलाई लामा की संस्था नहीं।” (आईएएनएस) |