<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>INDIA TIBET COORDINATION OFFICE</title>
	<atom:link href="http://www.indiatibet.org/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.indiatibet.org</link>
	<description>India Tibet Coordination Office</description>
	<lastBuildDate>Wed, 16 May 2012 06:08:31 +0000</lastBuildDate>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.3.1</generator>
		<item>
		<title>कुपोषण से लड़ने के लिए दलाई लामा ने दिए 16 लाख डॉलर</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 16 May 2012 03:05:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2346</guid>
		<description><![CDATA[आईएएनएस, 15-May-2012 नई दिल्ली&#124; तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने बाल कुपोषण दूर करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम के तहत एक गर सरकारी संगठन (एनजीओ) &#8216;सेव द चिल्ड्रेन&#8217; को 16 लाख डॉलर का अनुदान दिया। अनुदान की राशि दलाई लामा को लंदन में सोमवार को मिले टेम्पलटन अवार्ड का एक बड़ा हिस्सा है। [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>आईएएनएस, 15-May-2012</p>
<p><strong><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/1337087983_30mar_dalia.jpg"><img class="alignleft size-medium wp-image-2347" title="1337087983_30mar_dalia" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/1337087983_30mar_dalia-200x150.jpg" alt="" width="200" height="150" /></a>नई दिल्ली|</strong> तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने बाल कुपोषण दूर करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम के तहत एक गर सरकारी संगठन (एनजीओ) &#8216;सेव द चिल्ड्रेन&#8217; को 16 लाख डॉलर का अनुदान दिया। अनुदान की राशि दलाई लामा को लंदन में सोमवार को मिले टेम्पलटन अवार्ड का एक बड़ा हिस्सा है। एनजीओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है, &#8220;हमने दलाई लामा को टेम्पलटन अवार्ड जीतने पर बधाई दी। साथ ही अवार्ड की एक बड़ी राशि कुपोषण से लड़ने के लिए हमारे साथ साझा करने के लिए हमने उन्हें धन्यवाद दिया।&#8221;</p>
<p>दलाई लामा ने सोमवार को अवार्ड ग्रहण करते समय बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके लिए आर्थिक अवसर तलाशने को लेकर &#8216;सेव द चिल्ड्रेन&#8217; की कोशिशों की सराहना की थी।</p>
<p>एनजीओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थॉमस चांडी ने कहा कि अनुदान की जो राशि मिली है, उसका इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में और शहरी झुग्गियों में पोषण कार्यक्रम चलाने के लिए किया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>लंदन में दलाई लामा को टेंप्लेटन पुरस्कार</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%aa</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%aa#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 15 May 2012 04:00:22 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2343</guid>
		<description><![CDATA[बीबीसी हिन्दी, 14 मई, 2012 तिब्बत के निर्वासित धर्म गुरु दलाई लामा ने लंदन में 18 लाख डॉलर का टेंप्लेटन पुरस्कार ग्रहण किया है. ये पुरस्कार उन्हें विभिन्न धर्मों के बीच वैज्ञानिक शोध और समन्वय के लिए दिया गया है. लंदन के सेंट पॉल केथेड्रल चर्च में करीब दो हजार श्रोताओं के बीच उन्होंने चीनी अधिकारियों [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>बीबीसी हिन्दी, 14 मई, 2012</p>
<p><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/Screenshot-5.png"><img class="alignleft size-medium wp-image-2344" title="Screenshot-5" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/Screenshot-5-250x137.png" alt="" width="250" height="137" /></a>तिब्बत के निर्वासित धर्म गुरु दलाई लामा ने लंदन में 18 लाख डॉलर का टेंप्लेटन पुरस्कार ग्रहण किया है.</p>
<p>ये पुरस्कार उन्हें विभिन्न धर्मों के बीच वैज्ञानिक शोध और समन्वय के लिए दिया गया है.</p>
<p>लंदन के सेंट पॉल केथेड्रल चर्च में करीब दो हजार श्रोताओं के बीच उन्होंने चीनी अधिकारियों के साथ संघर्ष की जड़ों का जिक्र किया.</p>
<p>दलाई लामा ने उन्हें शरण देने के लिए भारत को धन्यवाद दिया.</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%aa/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>तिब्बत की स्वाधीनता एवं भारत की सुरक्षा पर कार्यशाला</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%ad</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%ad#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 11 May 2012 03:24:22 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2340</guid>
		<description><![CDATA[कटक, जागरण संवाददाता, 10 मई, 2012 भारत-तिब्बत सहयोग मंच एवं विशिष्ट विचार मंच की ओर से कटक शताब्दी भवन में मंगलवार शाम को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। तिब्बत के स्वाधीनता एवं भारत की सुरक्षा विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के तौर पर डा.कुलदीप चन्द्र अग्निहोत्री हिस्सा लिए। भारत तिब्बत सहयोग मंच [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>कटक, जागरण संवाददाता, 10 मई, 2012</p>
<p><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/10_05_2012-09bhup03-c-3.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-2341" title="10_05_2012-09bhup03-c-3" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/10_05_2012-09bhup03-c-3.jpg" alt="" width="195" height="146" /></a>भारत-तिब्बत सहयोग मंच एवं विशिष्ट विचार मंच की ओर से कटक शताब्दी भवन में मंगलवार शाम को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। तिब्बत के स्वाधीनता एवं भारत की सुरक्षा विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के तौर पर डा.कुलदीप चन्द्र अग्निहोत्री हिस्सा लिए। भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय संयोजक प्रो.डी.अग्निहोत्री ने कहा कि तिब्बत की भाषा, धर्म, संस्कृति को नष्ट करने के लिए चीन हमेशा प्रयास कर रहा है, जिसके लिए तिब्बत में अधिक से अधिक मात्रा में घुसपैठ करा रहा है, जिसका तिब्बत वासी विरोध कर रहे हैं। तिब्बत की स्वाधीनता के लिए भारत को अपनी विदेश नीति में बदलाव लाने की जरूरत है।</p>
<p>सम्मानित अतिथि के तौर पर पूर्व सांसद महामेघ वाहन ऐर खारावेल स्वांई ने भाग लेते हुए कहा कि भारत-तिब्बत संबन्ध काफी गहरा व पुराना है। भारत से ही बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार हुआ था। इसलिए तिब्बत के लोग भारतीयों को काफी पसंद करते हैं, लेकिन इसमें चीन खलल डाल रहा है। कार्यशाला को उद्घाटन कर पूर्व केन्द्र मंत्री ब्रजकिशोर त्रिपाठी ने कहा कि धर्म को लेकर सांस्कृतिक पर्यावरण के अन्दर बढ़ने वाले तिब्बत के लोग हमेशा अहिंसा पर बल देते हैं। मगर चीन वहां अस्थिरता पैदा कर उन्हें हिंसा का मार्ग अपनाने को मजबूर कर रहा है। इसको भारत निश्चित रूप से टाल सकता है।</p>
<p>इसलिए भारत को तिब्बत की स्वाधीनता के लिए दबाव बनाने की जरूरत है। शिक्षाविद डा.नारायण महान्ति की अध्यक्षता में चले इस कार्यक्रम में दीपक महान्ति ने अतिथि परिचय, गौरीशंकर साहू स्वागत भाषण व धन्यवाद ज्ञापन किए।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%ad/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>चीन बना रहा है भारत के खिलाफ जल-हथियार</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-2</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-2#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 09 May 2012 11:53:09 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[लेख व विचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2336</guid>
		<description><![CDATA[भारत का मीडिया पिछले अनेक वर्षों से सरकार को आगाह कर रहा था की चीन सरकार तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाकर उसके जलप्रवाह को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में सांगपो कहते हैं और सांगपो के प्रवाह को अवरुद्ध करके अथवा उसकी दिशा बदलकर चीन उत्तर -पूरब में पूरे [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/kuldeep-agnihotri.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-2337" title="kuldeep-agnihotri" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/kuldeep-agnihotri.jpg" alt="" width="150" height="118" /></a></p>
<p><strong>भारत </strong>का मीडिया पिछले अनेक वर्षों से सरकार को आगाह कर रहा था की चीन सरकार तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाकर उसके जलप्रवाह को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में सांगपो कहते हैं और सांगपो के प्रवाह को अवरुद्ध करके अथवा उसकी दिशा बदलकर चीन उत्तर -पूरब में पूरे प्रर्यावरण को बदल सकता है। ऐसी दशा में तिब्बत ब्रह्मपुत्र का प्रयोग भारत के खिलाफ एक हथियार के रुप में कर सकता है और चीन जिस प्रकार से पाकिस्तान का प्रयोग करके भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है उसमें यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी कि इस जल -हथियार का प्रयोग भी भविष्य में किया जाए। कुछ साल पहले हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में पारचू नदी में भयंकर बाढ आयी थी जिसके कारण जान-माल की बहुत हानि हुई थी। उस समय भी ऐसी खबरें आ रही थीं कि चीन सतलुज नदी के पानी को रोक रहा है। लेकिन चीन अब तक ब्रह्मपुत्र पर बनाए जा रहे जल-विद्युत प्रकल्प से स्पष्ट ही इनकार करता रहा है और चीन सरकार का वही इनकार भारत सरकार भारतवासियों का परोसती रही। और पूरे जोर से इस बात पर भी बल देती रही कि भारत के लोग इस पर विश्वास करें। उपर से देखने पर यह सब बडा निर्दोष लगता है। चीन की सरकार कोई बात कहती है और भारत की सरकार पूरे जोर से उसकी गवाही देती है तो भारत के लोग उस पर विश्वास क्यों नहीं करते? लगभग यही स्थिति 1950 के बाद पैदा हुई थी जब चीन सरकार सिक्यांग और तिब्बत को जोडने वाली सडक बना रही थी। यह सडक भारतीय क्षेत्र में से होकर गुजरती थी। मीडिया बार-बार हल्ला मचा रहा था परन्तु उस समय के प्रधानमंत्री पं.नेहरु आम जनता की छोडिए , संसद में संसद सदस्यों तक को डांटते थे कि यह सब झूठी अफवाहें हैं। इन पर विश्वास नहीं करना चाहिए।</p>
<p>ऐसा तो नहीं कहा जा सकता कि भारत सरकार के आंतरिक सूत्र और गुप्तचर विभाग इतना मृतप्राय हो चुका था कि उसे तेजी से निर्मित हो रही इस सडक के बारे में सूचना नहीं दे रहा था। परन्तु भारत सरकार इस सूचना को देश के लोगों से छिपाने के लिए ही अपना पूरा कौशल लगा रही थी। अंततः चीन ने स्वयं ही सडक पूरा हो जाने के बाद इसकी घोषणा करके हडकम्प मचा दिया था। अब ब्रह्मपुत्र पर बनाए जा रहे बांध को लेकर लगता है कि इतिहास अक्षरशः अपने आप को दोहरा रहा है। मीडिया के चिल्लाने और संसद सदस्यों के गुस्साने के बावजूद भारत सरकार आजतक देश को यही बताती रही कि ब्रह्मपुत्र पर कोई बांध नहीं बनाया जा रहा। परन्तु अब चीन सरकार ने भारत के विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा को चीन में ही बुलाकर कायदे से सूचित किया है कि तिब्बत में चीन ब्रहमपुत्र पर बांध बना रहा है। भारत सरकार ने उसी ईमानदारी से, जिस ईमानदारी से आज से 60 साल पूर्व पं0 नेहरु ने भारत में चीन द्वारा सडक निर्माण की सूचना दी थी, एक बार फिर देश को बता दिया है कि चीन ब्रह्मपुत्र के पानी को रोक रहा है। आखिर, भारत सरकार इतने वर्षों से इस बात को देश के लोगों से क्यों छुपाती रही? ऐसा तो हो नहीं सकता कि 15-20 दिन पहले चीन ने एस.एम कृष्णा को तिब्बत में बुलाकर उनसे इस बांध का भूमिपूजन करवाया हो और तभी उन्हे इस प्रकल्प की सूचना मिली। जाहिर है यह प्रकल्प काफी लम्बे समय से चल रहा था और भारत सरकार को भी इसका पता था लेकिन सरकार चीन से इस मुद्दे को उठाने की हिम्मत नहीं उठा पा रही थी अलबत्ता वह देश के लोगों से इसको छुपाने में ही अपनी मैनेजमेंट मान रही थी।</p>
<p>अभी भी, चीन ने भारत सरकार को इस बांध की सूचना देते हुए यह भी जोड दिया है कि इसके बारे में भारत को बताना जरुरी तो नहीं था लेकिन क्योंकि चीन भारत को अपना बेस्ट फ्रेंड मानता है और दोस्तों से कोई चीज छिपानी नहीं चाहिए इसलिए , उसने यह सबकुछ बताया है। यह बांध पिछले कई सालों से बन रहा है लेकिन क्या भारत सरकार इस देश के लोगों को अपना बेस्ट फ्रेंड नहीं मानती जो कि इसे छिपाने में ही अपनी ताकत लगाती रही। चीन ने तिब्बत में रेलवे लाईन को निर्माण करके उसे लगभग भारत की सीमा तक पहुंचा दिया है, ब्रह्मपुत्र और सतलुज के पानी से छेडखानी करके उसने एक नया जलहथियार बनान शुरु कर दिया है। एक बात का और ध्यान रखना चाहिए कि चीन इस प्रकार की कोई भी सूचना देने से पहले समय का चयन बहुत सावधानी से करता है। जब चीन के किसी प्रधानमंत्री और राष्टृपति को हिन्दुस्तान में आना होता है तो उसके दस दिन पहले वह यह घोषणा करता है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है। अब जब अगले महीने भारत की राष्ट्पति चीन की आधिकारिक यात्रा पर जा रहीं हैं तो चीन ने ब्रह्मपुत्र बांध की घोषणा करके अपना वहीं पुराना पैंतरा अपनाया है। आश्चर्य नहीं होना चाहिए यदि कल भारत सरकार ब्रह्मपुत्र पर बनाए जा रहे इस बांध को भी भारत -चीन मैत्री का प्रतीक ही घोषित कर दे जिस प्रकार उसने 1954 मंे तिब्बत की हत्या करने वाली भारत-तिब्बत (चीन) संधि को पंचशील का नाम दे दिया था। भारत सरकार जिस प्रकार चीन का तुष्टीकरण के मार्ग पर चली हुई है उससे अंतराष्ट्रीय राजनीति में भारत अपमानित भी हुआ है और पडोसी देशों में उसकी विश्वसनीयता भी घटती है। भारत सरकार को चाहिए कि वह चीन से इस बात का आग्रह करे कि जब तक तिब्बत समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता तब तक वह बलपूर्वक अधिग्रहित किए गए तिब्बत में भारी प्रकल्पों को प्रारम्भ न करे। हिमालयी क्षेत्रों में चीन को पानी के प्राकृतिक प्रवाहों से छेडखानी की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे पूरे देश की पारिस्थितिकी बदल जाएगी। जब तक भारत सरकार कैम्पफोलोवर की अपनी रणनीति नही ंबदलती तब तक चीन भारत को इसी प्रकार धकियाता रहेगा। सरकार को भारत की गरिमा के अनुकूल आचरण करना चाहिए। परन्तु क्या सोनिया गांधी की छत्रछाया में चलने वाले नेतृत्व में उस गरिमा से रु-ब -रु होने का साहस भी बचा है ?</p>
<p>जिन लोगों को यह भ्रम है कि भारत सरकार के मैत्रीपूर्ण रवैये से चीन अपने शत्रुतापूर्ण व्यवहार को त्यागदेगा, वे स्वयं ही भ्रम में नहीं बल्कि देश को भी भ्रमित करना चाहते हैं। चीन इस क्षेत्र में भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है इसलिए वह हर समय और हर स्थान पर भारत का विरोध करता रहता है। चीन ताकत की भाषा समझता है, तुष्टीकरण की चालें नहीं। जब उसने वियतनाम पर आक्रमण किया था तो छोटा सा देश होते हुए भी वियतनामियो ने जिस प्रकार से उससे टक्कर ली, उसके बाद उसका साहस वियतनाम से भिडने का नहीं हुआ। इसके विपरीत भारत की स्थिति यह है कि ब्रह्मपुत्र पर बन रहे बांध को रुकवाना तो दूर भारत सरकार चीन से इस मुद्दे पर विरोध करने का साहस भी नहीं जुटा पा रही है। यह प्रश्न भारत की, खासकर उत्तर पूर्व भारत की जीवन रेखा से जुडा हुआ प्रश्न है परन्तु दुर्भाग्य यह है कि भारत सरकार इसे छुपाने का प्रयास कर रही है न कि इसका सामना करने का।</p>
<p><strong>-डॉं कुलदीप चंद अग्निहोत्री</strong></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-2/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>भारत की सुरक्षा को तिब्बत की आजादी जरूरी: डॉ. सांग्ये</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 07 May 2012 02:31:13 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2333</guid>
		<description><![CDATA[जागरण, 6 मई, 2012 शिमला, जागरण संवाददाता। तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. लोबसांग सांग्ये ने रविवार को कहा कि तिब्बत की आजादी भारत की सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। चीन ने 50 वर्ष से तिब्बत पर कब्जा कर रखा है। चीन के अनुचित हस्तक्षेप की वजह से तिब्बत पर तो प्रभाव पड़ [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>जागरण, 6 मई, 2012</p>
<p><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/06_05_2012-lsangay06.jpg"><img class="alignleft size-medium wp-image-2334" title="06_05_2012-lsangay06" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/06_05_2012-lsangay06-183x150.jpg" alt="" width="183" height="150" /></a>शिमला, जागरण संवाददाता। तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. लोबसांग सांग्ये ने रविवार को कहा कि तिब्बत की आजादी भारत की सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। चीन ने 50 वर्ष से तिब्बत पर कब्जा कर रखा है। चीन के अनुचित हस्तक्षेप की वजह से तिब्बत पर तो प्रभाव पड़ ही रहा है, साथ ही बांग्लादेश और भारत की आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ रहा है।</p>
<p>डॉ. सांग्ये भारत तिब्बत सहयोग मंच की ओर से आयोजित एक संगोष्ठी में &#8216;तिब्बत की आजादी, भारत की सुरक्षा&#8217; विषय पर बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार रख रहे थे। उन्होंने कहा कि तिब्बत में चीन सिंधु और बह्मापुत्र नदियों पर बांध बना रहा है। इस वजह से तिब्बत सहित बांग्लादेश और भारत के कई हिस्सों में सिंचाई के स्रोत कम हो रहे हैं। चीनी सेना ने एक ही नदी पर 20 से अधिक बांध बना दिए हैं। इससे कभी भी आपदा आ सकती है। चीन, तिब्बत की आड़ में पड़ोसी राज्यों को कमजोर करने पर तुला हुआ है।</p>
<p>भारत की सुरक्षा के लिए भी चीन खतरा बनता जा रहा है। सांग्ये ने कहा कि भारत ने तिब्बती समुदाय का सबसे अधिक सहयोग किया है। अगर भारत उन्हें अपने यहां रहने की अनुमति न देता तो पता नहीं क्या होता।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>चीन का सामान खरीदना छोड़ो</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 03 May 2012 03:16:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2325</guid>
		<description><![CDATA[जागरण, 2 मई, 2012 जागरण संवाददाता, धर्मशाला : आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि चीन पर मिसाइल छोड़ने की नहीं, बल्कि उसका सामान न खरीदने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर हम चीन का सामान खरीदना बंद कर दें तो उसे खुद ही घुटने टेकने के लिए लिए मजबूर होना पड़ेगा। [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>जागरण, 2 मई, 2012</p>
<p><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/Gyalwang-Karmapa.jpg"><img class="alignleft size-medium wp-image-2326" title="Gyalwang Karmapa" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/Gyalwang-Karmapa-225x150.jpg" alt="" width="225" height="150" /></a>जागरण संवाददाता, धर्मशाला : आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि चीन पर मिसाइल छोड़ने की नहीं, बल्कि उसका सामान न खरीदने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर हम चीन का सामान खरीदना बंद कर दें तो उसे खुद ही घुटने टेकने के लिए लिए मजबूर होना पड़ेगा। हिमालय को बचाने के लिए तिब्बत, नेपाल, भूटान व भारत को एकजुट होकर मुकाबला करना होगा व इसके लिए तैयार रहना होगा। इंद्रेश कुमार बुधवार को धर्मशाला में &#8216;हिमालय पर बढ़ते खतरे&#8217; विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देशहित में यह जरूरी है कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व श्रीनगर में रेल लाइन बिछानी चाहिए। कहा कि हिमालय परिवार की ओर से भी केंद्र सरकार को पत्र व प्रस्ताव भेजकर दबाव बनाने का प्रयास किया जाएगा। बकौल इंद्रेश कुमार, तिब्बत में आत्महत्याएं ही नहीं हुई बल्कि लोगों ने देश के प्रति प्राण न्योछावर कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में बहने वाली 16 हजार नदियों में से पांच हजार सिर्फ हिमालय से निकलती हैं और विश्व का सबसे बड़ा जलस्रोत भी हिमालय ही है। छह हजार पर्वत चोटियां व अन्य वनस्पति भी हिमालय में है।</p>
<p><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/Himalaya-Pariwar.jpg"><img class="alignleft size-medium wp-image-2327" title="Himalaya Pariwar" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/05/Himalaya-Pariwar-246x150.jpg" alt="" width="246" height="150" /></a>यह धरती पूरी तरह से अध्यात्मिक है। इंद्रेश कुमार ने कहा कि चीन न्यूक्लीयर शक्ति बनना चाहता है। करमापा प्रकरण पर उन्होंने कहा कि उग्येन त्रिनले दोरजे के पीछे कोई एजेंसी तो अपना रोल अदा नहीं कर रही है, यह भी जांचने की जरूरत है। कहा कि ऐसा भी हो सकता है कि यह सारा प्रकरण करमापा को उनके अनुयायियों से दूर करने का प्रयास हो। उन्होंने कहा कि करमापा ने भारत के कानून व न्यायप्रणाली का सम्मान करते हुए उसे स्वीकार किया और उसके अनुसार ही चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच में समय पर सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%8b/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>इस वर्ष नहीं होगी मिस तिब्बत प्रतियोगिता</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 02 May 2012 03:29:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2330</guid>
		<description><![CDATA[जागरण, 1 मई 2012 कार्यालय संवाददाता, पालमपुर : पिछले दस वर्ष से मैक्लोडगंज में लगातार होती आ रही मिस तिब्बत प्रतियोगिता इस दफा नहीं होगी। प्रतियोगिता के आयोजक लोबसांग बांग्याल ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एलडब्ल्यू प्रोडेक्शन के निदेशक लोबसांग बांग्याल ने बताया कि तिब्बत में स्थिति तनावपूर्ण बनी है तथा 2011 से अब तक आत्मदाह [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>जागरण, 1 मई 2012</p>
<p>कार्यालय संवाददाता, पालमपुर : पिछले दस वर्ष से मैक्लोडगंज में लगातार होती आ रही मिस तिब्बत प्रतियोगिता इस दफा नहीं होगी। प्रतियोगिता के आयोजक लोबसांग बांग्याल ने मंगलवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>एलडब्ल्यू प्रोडेक्शन के निदेशक लोबसांग बांग्याल ने बताया कि तिब्बत में स्थिति तनावपूर्ण बनी है तथा 2011 से अब तक आत्मदाह के करीब 34 मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में इस स्थिति के बीच उन्होंने मिस तिब्बत का आयोजन न करने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि हर वर्ष जून में इस प्रतियोगिता का आयोजन होता था। इसमें देश व विदेश के विभिन्न भागों में रह रही तिब्बती सुंदरियां भाग लेती थीं। आर्थिक मदद के अभाव में भी लोबसांग बांग्याल ने मिस तिब्बत का आयोजन लगातार जारी रखा। गत वर्ष ही मिस तिब्बत के दस वर्ष पूरा होने पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था लेकिन इस बार इसका आयोजन न होने से तिब्बती युवाओं को निराशा हाथ लगेगी। वहीं, लोबसांग बांग्याल ने बताया कि इसके अलावा इस वर्ष से शुरू की जा रही मिस हिमालय प्रतियोगिता अक्टूबर में होगा। इस प्रतियोगिता में हिमालय रेंज में रहने वाली तिब्बती व नेपाली सुंदरियां हिस्सा ले पाएंगी।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>आजादी नहीं, पर्याप्त स्वायत्तता चाहिएः लामा</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%86%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%86%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 30 Apr 2012 03:50:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2320</guid>
		<description><![CDATA[अमर उजाला, 30 अप्रैल, 2012 तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने कहा है कि तिब्बती चीन से पूर्ण आजादी की मांग नहीं कर रहे बल्कि वे अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए ‘पर्याप्त स्वायत्तता’ चाहते हैं। दलाई लामा ने शनिवार को यह बात ओटावा में मौजूद 7,000 से ज्यादा लोगों के बीच कही। उन्होंने तेज रफ्तार [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>अमर उजाला, 30 अप्रैल, 2012</p>
<p><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/04/2012_04_27_Ottawa_N01.jpg"><img class="alignleft size-medium wp-image-2321" title="2012_04_27_Ottawa_N01" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/04/2012_04_27_Ottawa_N01-225x150.jpg" alt="" width="225" height="150" /></a>तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने कहा है कि तिब्बती चीन से पूर्ण आजादी की मांग नहीं कर रहे बल्कि वे अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए ‘पर्याप्त स्वायत्तता’ चाहते हैं। दलाई लामा ने शनिवार को यह बात ओटावा में मौजूद 7,000 से ज्यादा लोगों के बीच कही। उन्होंने तेज रफ्तार से बढ़ती चीनी अर्थव्यवस्था के साथ संबंधों और तिब्बतियों के मानवाधिकारों को लेकर संतुलन बनाने के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर की सराहना की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हार्पर ने चीन के साथ उनके देश के नजदीकी संबंधों को बहुत बेहतर तरीके से बनाकर रखा है। साथ ही उन्होंने अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को भी बहुत बेहतर तरीके से बचाकर रखा है। उन्होंने मुझसे मुलाकात करके साहस दिखाया है, इसलिए मैं इस बात से बहुत खुश हूं।</p>
<p>दलाई लामा ने चीन के साथ संबंधों को बरकरार रखने के लिए कनाडा को प्रोत्साहित किया। तिब्बती नेता ने कहा कि हार्पर से मुलाकात के दौरान उन्होंने इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि कनाडा ने 1000 तिब्बतियों को पांच साल के लिए उनके देश में रहने का प्रबंध किया। ये सभी 1000 लोग भारत से आए थे।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%86%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>तिब्बत के लिए अभी भी ‘मध्य मार्ग’ सबसे बेहतर: दलाई लामा</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 27 Apr 2012 03:30:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2315</guid>
		<description><![CDATA[आज तक 26th अप्रैल 2012 तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा है कि चीन के इस आरोप के बावजूद कि वह तिब्बत में अशांति फैलाने के लिए लोगों को उकसा रहे हैं, वह तिब्बत की स्वायत्तता के लिए अपने अहिंसक आंदोलन के रास्ते को नहीं छोडेंगे. चीनी प्रशासन के खिलाफ वर्ष 2011 में शुरू हुए विरोध के बाद से कुल [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>आज तक 26th अप्रैल 2012</p>
<p><a href="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/04/his-holiness1.jpg"><img class="alignleft size-medium wp-image-2316" title="his holiness" src="http://www.indiatibet.org/wp-content/uploads/2012/04/his-holiness1-250x130.jpg" alt="" width="250" height="130" /></a>तिब्बत के निर्वासित <a href="http://aajtak.intoday.in/story.php/content/view/686327/13/0/Chinese-objection-routine-Dalai-Lama%E2%80%8E.html" target="_blank">आध्यात्मिक नेता दलाई लामा</a> ने कहा है कि <a href="http://aajtak.intoday.in/story.php/content/view/694300/73/0/China-accuses-Dalai-Lama-of-being-sponsored-by-US.html" target="_blank">चीन</a> के इस आरोप के बावजूद कि वह तिब्बत में अशांति फैलाने के लिए लोगों को उकसा रहे हैं, वह तिब्बत की स्वायत्तता के लिए अपने अहिंसक आंदोलन के रास्ते को नहीं छोडेंगे.</p>
<p>चीनी प्रशासन के खिलाफ वर्ष 2011 में शुरू हुए विरोध के बाद से कुल 34 तिब्बतियों ने आत्मदाह कर लिया है, जिसमें अधिकांश बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणियां शामिल हैं.</p>
<p>इसमें से ज्यादातर ने बीजिंग पर तिब्बत की संस्कृति के दमन का आरोप लगाते हुए खुद को आग लगा ली थी और उसीके चलते उनकी मौत हुई. चीन हमेशा दलाई लामा पर तिब्बतियों को आत्मदाह के लिए उकसाने का आरोप लगाता रहा है लेकिन उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया है.</p>
<p>नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं के सम्मेलन में उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में चीजें काफी कठिन हुयी है लेकिन हमारा रुख नहीं बदला है. आजादी, पूर्ण आजादी अवास्तविक है- इसका तो सवाल ही नहीं उठता है. दलाई लामा ने कहा कि बदलाव के लिए उनके अहिंसात्मक मध्य मार्ग को अधिकतर तिब्बतियों का समर्थन हासिल है. सम्मेलन खत्म होने के बाद संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि इसलिए हम इसे जारी रख सकते हैं.</p>
<p>दलाई लामा ने कहा कि भारत में निर्वासित तिब्बती नेतृत्व चीन सरकार के साथ तिब्बती अल्पसंख्यकों के लिए ‘सार्थक स्वायत्तता’ पर ‘उद्देयपूर्ण वार्ता’ के लिए अभी भी प्रतिबद्ध है. विदेशों में स्थित तिब्बती मानव अधिकार समूहों ने कहा है कि पिछले सप्ताह सिचुआन प्रांत में एक युवा तिब्बती जोड़े ने खुद को आग लगा ली.</p>
<p>सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीकी आर्कबिशप डेसमंड टूटू समेत 12 नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं ने चीन के राष्ट्रपति से दलाई लामा के साथ वार्ता बहाल करने का आग्रह किया. बहरहाल, तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने कहा कि अब तक की वार्ता उपयोगी नहीं रही है.</p>
<p>हंसते हुए उन्होंने कहा कि कभी-कभार मैंने कहा है कि सर्वाधिकारवादी सत्ता के पास कान नहीं हैं केवल मुंह है. चीनी अधिकारी हमेशा हमें उपदेश देते हैं लेकिन कभी कुछ सुनते नहीं.</p>
<p>दलाई लामा ने कहा कि सरकार से सकारात्मक या ठोस परिणाम को लेकर हमारी सारी कोशिश नाकाम रही है लेकिन चीनी जनता या चीनी बुद्धिजीवी या विदेशों में पढने वाले छात्र हमेशा से इस सच्चाई से अवगत हैं.</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>दो और तिब्बती युवाओं ने की आत्मदाह की कोशिश</title>
		<link>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80</link>
		<comments>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 20 Apr 2012 04:07:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator>India Tibet Coordination Office</dc:creator>
				<category><![CDATA[मुख्य समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.indiatibet.org/?p=2313</guid>
		<description><![CDATA[बीबीसी हिन्दी, 19 अप्रैल, 2012  तिब्बती अधिकारों के लिए काम कर रहे एक समूह का कहना है कि दक्षिण पश्चिम चीन में दो और तिब्बती लोगों ने चीनी शासन के खिलाफ आत्मदाह की कोशिश की है. फ्री तिब्बत समूह के मुताबिक दो युवाओं ने तिब्बती मठ के सामने एक साथ विरोध में खुद को आग के हवाले कर [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<div id="gt-res-wrap">
<div id="gt-res-content">
<div dir="ltr">बीबीसी हिन्दी, 19 अप्रैल, 2012</div>
</div>
<div id="gt-res-tools">
<div id="gt-src-tools-l"></div>
<div id="gt-res-tools-r">
<div id="gt-res-listen" data-tooltip="Listen" data-tooltip-align="t,c"> तिब्बती अधिकारों के लिए काम कर रहे एक समूह का कहना है कि दक्षिण पश्चिम चीन में दो और तिब्बती लोगों ने चीनी शासन के खिलाफ आत्मदाह की कोशिश की है.</div>
</div>
</div>
</div>
<p>फ्री तिब्बत समूह के मुताबिक दो युवाओं ने तिब्बती मठ के सामने एक साथ विरोध में खुद को आग के हवाले कर दिया.  समूह के मुताबिक इन दोनों को स्थानीय लोग वहां से हटे ले गए, लेकिन अभी उनकी क्या हालत है, इस बारे में कुछ पता नहीं.</p>
<p>पिछले एक साल में तीस से भी ज्यादा तिब्बती चीनी शासन के खिलाफ आत्म दाह कर चुके हैं.</p>
</div>
<div>
<div><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/04/120419_tibet_fire_rn.shtml#page-top"><br />
</a></div>
</div>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.indiatibet.org/%e0%a4%a6%e0%a5%8b-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%ac%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80/feed</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>

